Wednesday, December 3, 2014

एक कुत्ते की सोच


अपनी गली मे जाते हुए एक  कुत्ते को विचार मग्न 
आदमियों की तरह अवसाद से भरा हुआ देख 
मन में सम-वेदना हुई, पूछा क्या बात है दोस्त?

पहले उसने, चारों तरफ मुस्तैदी से नजरें घुमाईं 
चारों और कोई और ना देख,  हमसे आँखें मिलाईं 
बोला, कुछ ना पूछो तो ही अच्छा है
कहाँ से शुरू करूँ, पूरा जीवन संघर्षों से ही भरा है,
इस गली के उस नुक्कड़ से लेकर, उस चौराहे तक 
मेरा इलाका होता है, आप तो समझते होंगे,
कितना होता है मुश्किल, अपनी पोजीशन बचाये रखना
कदम-कदम पर दोस्तों-दुश्मनों से होता है, सावधान रहना॥ 

मैं चौंका, दुश्मन तो ठीक, पर दोस्तों से?
वो भला, फिर आप अभी तक किसी पोजीशन पर पहुंचे नहीं है 
वरना ऐसी बातों से नावाकिफ ना होते
हर वक्त इम्तेहान होता है, मौकों की तलाश में रहते हैं
अपने से नीचे वाले, और  कुर्सी जाते देर नहीं लगती

मैंने आह ली, फुरसत है तुम्हारे पास सारा दिन
वो बोला, आप भी मज़ाक करते हैं,
अपने इलाके के चप्पे-चप्पे,पर हर वक्त गश्त
आने-जाने वालों पर निगरानी, अपने-परायों की पहचान
और बावजूद इसके नहीं है हमारी कोई मुकम्मिल पहचान 
लम्बी फेहरिश्त है ,हमारे कामों और जिम्मेदारियों की 
पर नहीं है बात कोई कहीं अधिकारों की॥ 

मैंने चुटकी ली, और जो दिन भर तुम धुप में,
सरे राह पड़े हुए सुस्ताते हो, वो सब?
वो थोड़ा गुरगुरया, क्या कभी हमें कम मुस्तैद पाया है
हमारे यहां, सुनी जाती है, सबकी बात 
सब अपनी मेहनत का ही पाते हैं, ऊपर से नीचे तक॥  

मैंने कहा, देखो जो तुम लोग कई बार 
समय-बेसमय जो चिल्ल-पों मचाते हो वो क्या है?
वो बोला, अहसास भी है आपको,
कि, हम लोग किस दौर से गुजरते हैं,
बस सब तरफ संदेह  भरा माहौल और दुश्मन 
को मार भगा देने के लिए पुरजोर कोशिशें, 
और आप समझते हैं, कि हम गैर जिम्मेदारन हैं
हमारे नाम पर "गालियां " तक दी जाती हैं ॥

मैंने कहा, तू कुत्ता होकर
आदमियों की समस्याओं से जूझ रहा है,  
दिल छोटा मत कर, हमारे यहाँ तो 
आदमी होकर भी, लोग समय-बेसमय कुत्तों वाली राह लेते हैं
बस शरीर भर का अंतर रह जाता है
भेद मिट जाता है, और आदमी भी तुम्हारे जैसा हो जाता है 
तुम कम से कम ईमानदार कुत्ते भर हो 
हमारे यहां तो है बड़ा मुश्किल, बस आदमी भर होना॥ 

और इतना सुन वो गली के उस मुहाने पर हो रही 
सरगर्मियों की तरफ मुस्तैदी से मुखातिब हुआ 
मैं भी एक नये अहसास के साथ हुआ अपनी राह ॥